October 27, 2026

प्रशासन मौन, माफिया बेखौफ! क्या अस्तित्व खो देंगी जिले की जीवनदायिनी नदियाँ?

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जिले की नदियाँ आज कराह रही हैं, और जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के विभिन्न नदी-नालों और तटवर्ती क्षेत्रों में अवैध बालू उत्खनन का कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। संगठित बालू माफियाओं द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, जिससे शासन को लाखों-करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है और पर्यावरण संतुलन गहरे संकट में है।

चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ शासन द्वारा विधिवत टेंडर स्वीकृत किए गए हैं, वहाँ भी बिना रॉयल्टी भुगतान के धड़ल्ले से बालू का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। खासकर रात्रिकालीन समय में भारी वाहनों की आवाजाही से यह अवैध कारोबार चरम पर है, जो प्रशासनिक नियमों को खुली चुनौती दे रहा है।
अवैध बालू उत्खनन के कारण नदियों का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है, जलस्तर लगातार गिर रहा है और भविष्य में बाढ़, कटाव व जलसंकट जैसी भयावह समस्याओं का खतरा मंडरा रहा है। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय ग्रामीणों में भी इस अवैध गतिविधि को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने कलेक्टर, सारंगढ़–बिलाईगढ़ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि समय रहते अवैध बालू उत्खनन पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम जिले को भुगतने पड़ेंगे।
समिति ने मांग की है कि दोषी बालू माफियाओं एवं उन्हें संरक्षण देने वाले जिम्मेदारों पर कड़ी और त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि जिले की नदियों को बचाया जा सके और शासन के राजस्व की रक्षा हो सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस रेत माफिया के खिलाफ कब तक सख़्त रुख अपनाता है, या फिर नदियों का यूँ ही दोहन होता रहेगा।

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