बस बहुत हुआ अपमान..! 7000 समिति योद्धाओं ने फेंका इस्तीफा, कल से ‘जेल भरो’ आंदोलन – छत्तीसगढ़ सरकार की उल्टी गिनती शुरू…!
क्या जिला प्रशासन राजस्व विभाग और पंचायत सचिवों की बदौलत समर्थन मूल्य में धान की खरीदी करेगी या कुछ और नया माजरा नजर आने वाला है, और कितने कर्मचारियों के ऊपर प्रशासन की गाज गिरेगी..?
रायपुर / महासमुंद स्थानीय लोहिया चौक में विगत 03 नवम्बर 2025 से आज 17 नवंबर 2025 को समितियों के कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा के बाद कल जेल भरो आंदोलन के साथ उग्र कर्मचारियों की व्यथा कथा एवं आप बीती की अजीबों गरीब दास्तान बता दे कि, छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने में महज कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन पूरा सिस्टम ठप होने की कगार पर पहुँच गया है। प्रदेश की 2058 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) के हजारों नियमित, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने सोमवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा सीधे राज्यपाल, मुख्यमंत्री और संभागीय आयुक्त को भेजा गया है।
कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है – “जब तक दमन बंद नहीं होता, ESMA हटाया नहीं जाता, बकाया वेतन नहीं दिया जाता और हमारी सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हम धान खरीदी के किसी भी काम में हिस्सा नहीं लेंगे।”

इस्तीफे की मुख्य वजहें
कई-कई महीनों से वेतन बकाया, घर चलाना मुश्किल
अवैध तरीके से लगाया गया ESMA (Essential Services Maintenance Act)
बिना वजह थाना, FIR और कोर्ट-कचहरी के चक्कर
मनमाने ढंग से सेवा मुक्ति के आदेश
कंप्यूटर ऑपरेटरों को सिर्फ 6 महीने का वेतन, जबकि साल भर काम
धान में नमी आने पर कमीशन कटौती, जबकि समय पर उठाव सरकार/मार्केटिंग फेडरेशन की जिम्मेदी है।
कर्मचारियों का दिल दहला देने वाला बयान
संयुक्त कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा –
“हम अपराधी नहीं हैं कि हम पर ESMA थोपा जाए। हम सिर्फ अपना हक माँग रहे हैं, बदले में मिल रहा है जुल्म, अपमान और FIR। अब बहुत हुआ। हमने सम्मान के साथ इस्तीफा दे दिया है। अब छत्तीसगढ़ सरकार खुद आकर धान तौलें, टोकन काटें, डेटा अपलोड करें और किसानों को भुगतान करें।”
धान खरीदी पूरी तरह ठप होने का खतरा
किसान पंजीयन, टोकन वितरण, बारदाना वितरण, तौलाई, भंडारण, डेटा अपलोड, भुगतान – सब कुछ इन्हीं समिति कर्मचारियों के हाथ में होता है।
एक भी कर्मचारी काम पर नहीं आएगा तो हजारों केंद्रों पर ताला लटक जाएगा।
लाखों किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँगे।
सरकार के सामने चार बड़े सवाल
क्या मुख्यमंत्री कार्यालय खुद 2058 समितियों में धान खरीदी चलाएगा?
क्या 10-15 दिन में नया स्टाफ तैयार हो जाएगा?
क्या बिना प्रशिक्षण के कोई नया व्यक्ति 48 घंटे में पूरा पोर्टल, सॉफ्टवेयर और प्रक्रिया सीख लेगा?
क्या इस बार भी किसानों का गुस्सा सड़कों पर दिखेगा..?
आंदोलन अब सिर्फ वेतन का नहीं, सम्मान का संघर्ष बन चुका है।
कर्मचारियों ने साफ कर दिया है – “अब पीछे हटना नामुमकिन है। हमने इस्तीफा दे दिया, अब सरकार चाहे तो स्वीकार कर ले या हमारी माँगें मान ले। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, धान खरीदी के मैदान में हम नहीं उतरेंगे।”
छत्तीसगढ़ की जनता और किसान हैरान-परेशान हैं। हर तरफ एक ही सवाल –
“अगर समिति कर्मचारी ही नहीं रहेंगे तो धान खरीदी कौन करेगा?”
अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है।
या तो तुरंत वार्ता करके सभी माँगें मानी जाएँ और ESMA हटाया जाए,
या फिर प्रदेश सबसे बड़े प्रशासनिक और कृषि संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है।
आने वाले 48-72 घंटे तय करेंगे कि इस बार किसान का धान गोदाम में पहुँचेगा या सड़क पर आंदोलन में..!
