एन.टी.पी.सी. कोल माइंस प्रोजेक्ट, तलाईपल्ली — संविदाकर्मियों ने एन टी पी सी प्रबंधन को दिया 3 दिवस का अल्टीमेटम, सांसद एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
एन.टी.पी.सी. कोल माइंस प्रोजेक्ट, तलाईपल्ली (रायकेरा, जिला रायगढ़) में कार्यरत समस्त संविदाकर्मियों ने परियोजना प्रमुख को एक पुनः स्मरण पत्र (Reminder Letter) सौंपा है, जिसमें उन्होंने दिनांक 15 अक्टूबर 2025 को भेजे गए अपने मांग पत्र पर अब तक कोई कार्यवाही न होने पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है।
संविदाकर्मियों ने बताया कि 7 दिवस की निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद नियोक्ता प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया या समाधान प्रस्तुत नहीं किया गया है, इससे संविदाकर्मियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

संविदाकर्मियों की प्रमुख मांगें —
1. एन.टी.पी.सी. से संबंधित अन्य संविदाकर्मियों के समान HRA, Communication Allowance एवं Conveyance Allowance जैसी स्वीकृत भत्तों का लाभ संविदाकर्मियों को भी प्रदान किया जाए।
2. सभी ठेका कंपनियों का एकीकरण (Merge) कर “One Site – One Contract” की नीति लागू की जाए।
3. मेंटनेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए किए जाने वाले 1 वर्ष के अनुबंध की अवधि बढ़ाकर 3 वर्ष की जाए, जिससे रोजगार स्थायित्व सुनिश्चित हो सके
संविदाकर्मियों ने चेतावनी दी
कि यदि अगले 3 दिवस के भीतर आवश्यक कार्यवाही नहीं की गई, तो वे बाध्य होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। हड़ताल के दौरान उत्पादन कार्यों के साथ-साथ डिस्पैच (Dispatch) कार्य भी पूर्णतः स्थगित रहेगा, जिससे परियोजना की समस्त कार्यप्रणाली प्रभावित होगी।
इस पूरे प्रकरण को लेकर सभी संविदाकर्मियों ने माननीय सांसद महोदय रायगढ़ जी से मुलाकात कर एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर सांसद महोदय द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया (Positive Response) दी गई एवं मजदूरों की मांगों को उचित बताते हुए प्रशासन से शीघ्र समाधान की बात कही गई।
इसके अतिरिक्त, संविदाकर्मियों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, घरघोड़ा तथा थाना प्रभारी, घरघोड़ा को भी ज्ञापन सौंपा गया, ताकि स्थानीय प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया जा सके एवं आवश्यक हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा सके।
संविदाकर्मियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी टकराव की भावना से नहीं, बल्कि अपने वैधानिक अधिकारों और मजदूर हितों की रक्षा हेतु है। उन्होंने एन.टी.पी.सी. प्रबंधन से अनुरोध किया है कि मजदूरों की जायज़ मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर औद्योगिक शांति बनाए रखी जाए।


