साइबर ठगी का कहर: 2025 में 5 महीनों में 7,000 करोड़ की चपत, लाखों भारतीय फंसे जाल में..!
नई दिल्ली / डिजिटल युग में जहां एक क्लिक से दुनिया जुड़ रही है, वहीं साइबर अपराधी भी अपनी चालें तेज कर रहे हैं। गृह मंत्रालय (एमएचए) की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि जनवरी से मई 2025 तक देशवासियों को ऑनलाइन ठगी से लगभग 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यह रकम इतनी बड़ी है कि औसतन हर महीने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लूट हो रही है। इनमें से ज्यादातर मामले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया से संचालित हो रहे हैं, जहां भारतीयों को नौकरी के बहाने फंसाकर ठगी के गिरोह में शामिल किया जा रहा है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के आंकड़ों के मुताबिक, इन स्कैमर्स ने आधे से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपील की है कि अनजान कॉल्स पर विश्वास न करें और सतर्क रहें। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यही रफ्तार जारी रही, तो पूरे साल में नुकसान 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
पिछले साल की बात
करें तो 2024 में साइबर फ्रॉड से रिकॉर्ड 22,845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो 2023 की तुलना में 206 प्रतिशत ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े, जिनमें सरकारी योजनाओं के नाम पर निवेश के झांसे और स्टॉक ट्रेडिंग स्कैम प्रमुख रहे। पूरे साल में 36 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं, और 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं। आई4सी ने इस साल अब तक 4,000 से ज्यादा संदिग्ध स्काइप आईडीज को ब्लॉक किया है, लेकिन अपराधियों की नई-नई तकनीकें चुनौती बनी हुई हैं। 2022 में जहां 10 लाख से ज्यादा मामले थे, वहीं 2024 में यह संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई। सरकार ने साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए बजट में 782 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, साथ ही पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाए जा रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट नया हथियार, लाखों का नुकसान
साइबर ठगों का सबसे खौफनाक तरीका ‘डिजिटल अरेस्ट’ बन गया है, जहां वे खुद को सीबीआई, ईडी या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को ‘गिरफ्तार’ होने का डर दिखाते हैं। सितंबर 2025 में गुरुग्राम की एक महिला इसी जाल में फंस गई और तीन दिनों में 5.85 करोड़ रुपये गंवा बैठी। ठगों ने उसे मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी और बैंक ट्रांसफर करवा लिए। महिला ने बैंक पर लापरवाही का आरोप लगाया, क्योंकि इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर पर कोई अलर्ट नहीं आया। इसी तरह, दिल्ली के एक रिटायर्ड बैंकर ने 23 करोड़ रुपये खोए, और उज्जैन की एक महिला ने 5 लाख रुपये। 2022 से 2024 तक ऐसे मामले तीन गुना बढ़कर 1.23 लाख हो गए हैं। सरकार ने ‘ऑपरेशन चक्र’ जैसे अभियान चलाकर कई गिरोहों को पकड़ा है, लेकिन क्रॉस-बॉर्डर होने से मुश्किलें हैं।
बचाव के उपाय जागरूकता है कुंजी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान कॉल पर कभी बैंक डिटेल्स न शेयर करें। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज कानूनी रूप से नहीं होती, इसलिए डरें नहीं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर तुरंत रिपोर्ट करें। दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) लगाएं और मजबूत पासवर्ड यूज करें। सरकार के टीवी और अखबारी कैंपेन से सीखें – असली अधिकारी कभी फोन पर पैसे नहीं मांगते। यह बढ़ता खतरा सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि विश्वास का भी नुकसान कर रहा है। समय रहते सतर्क रहें, ताकि डिजिटल इंडिया सुरक्षित बने।
