January 16, 2026

13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म मामला: फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई आरोपी हेमंत यादव को 20 वर्ष की सजा

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सारंगढ़। फॉस्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) सारंगढ द्वारा आरोपी हेमंत यादव को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया।

दिनाँक 08/01/2026 को न्यायालय माननीय अपर सत्र न्यायाधीश फॉस्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) सारंगढ़ श्री अमित राठौर के न्यायालय में थाना सरिया के अपराध जो कि विशेष आपराधिक प्रकरण अंतर्गत पॉक्सो एक्ट से संबंधित है में आरोपी हेमंत यादव पिता दुर्गा प्रसाद यादव निवासी वार्ड क्रमांक 15  सरिया थाना सरिया जिला-सारंगढ़ बिलाईगढ़ के द्वारा 13 वर्षीय  नाबालिक पीड़ित बालिका को पसंद करने और शादी करने की बात बोलकर साथ नहीं चलने से जहर पीकर मरने की धमकी देकर सह आरोपी अपने बुआ के घर ले जाकर शारीरिक संबंध बनाया था इसके संबंध में पीड़ित बालिका के परिजन के द्वारा थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया गया था, जिस पर थाना – सरिया मे अपराध पंजीबद्ध कर माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था ।

पीडित बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर प्रकरण लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 का पाये जाने से माननीय अपर सत्र न्यायाधीश फॉस्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट सारंगढ़ के द्वारा मामले का त्वरित विचारण कर सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद  आरोपी को भा.द.स. की धारा 363के तहत 05 वर्ष के सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है एवं धारा 366 भा.द.स. के तहत 07 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माना तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4 (2) में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है। अदालत के द्वारा मामले की सवेदनशीलता को देखते हुए पीडिता के शारीरिक एवं मानसिक क्षति एवं पुनर्वास हेतु लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत राज्य शासन को प्रतिकर भुगतान किये जाने की अनुशंसा की गई है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012,

18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है यह फैसला बाल सुरक्षा एवं यौन अपराध के खिलाफ राज्य शासन एवं न्याय पालिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण  अधिनियम 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रभावित करता है, इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने अभियोजन का पक्ष रखते हुए पैरवी की।

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