15 साल से कुंडली जमाए बैठे सचिव के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, कहा – अब बर्दाश्त नहीं करेंगे भ्रष्टाचार!
खरसिया। ग्राम पंचायत नावापारा (पूर्व) में 15 वर्षों से जमे पंचायत सचिव मनोज कुमार डनसेना के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब उफान पर है। सचिव को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत सीईओ, जिला पंचायत सीईओ, और यहां तक कि सांसद राधेश्याम राठिया तक शिकायत पहुंचा दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मनोज डनसेना पंचायत में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के एवज में रिश्वत की मांग की जाती है, और जो पैसा नहीं देता उसे महीनों तक चक्कर कटवाया जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 4-5 महीनों से लगातार शिकायत के बावजूद अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चुप बैठ गए हैं।
कैंप लगा, लेकिन सचिव बचाव की चाल बताई जा रही
गांव में हाल ही में एक सरकारी शिविर का आयोजन किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह शिविर सिर्फ सचिव को बचाने की एक “प्रायोजित कोशिश” थी। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त सीईओ से जब मीडियाकर्मियों ने सचिव को हटाने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने जनपद सीईओ के आदेश का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना था, “मुझे केवल कैंप लगाने को कहा गया है, सचिव को हटाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।”
जब पूछा गया कि गांव में पहले कब ऐसा शिविर हुआ था, तो उन्होंने खुद स्वीकारा कि “यह पहला शिविर है” – जिससे ग्रामीणों के शक को और बल मिला।
गांव में जलसंकट, सचिव गायब!
गांव में बोरिंग का जलस्तर गिर चुका है, जिससे पानी की भारी किल्लत हो गई है। लेकिन सचिव हर बार “समय नहीं है” का बहाना बनाकर ग्रामीणों को टाल देता है। नल-जल योजना हो या प्रधानमंत्री आवास – सभी योजनाओं में बेरुखी और लेनदेन का आरोप लग रहा है।
अब आर-पार की लड़ाई
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सचिव को नहीं हटाया गया, तो जनपद पंचायत कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। गांववालों का कहना है, “15 साल से ये सचिव कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठा है, अब बर्दाश्त नहीं होगा!”
जिला पंचायत प्रशासन की चुप्पी ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है। ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि शासन-प्रशासन उनकी आवाज़ सुनेगा।
