October 26, 2026

राजधानी के भू-लोक में सम्पन्न होगा छत्तीसगढ़ी महोत्सव तीज त्यौहार नई दिशा देंगे – आलोक

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संयुक्त महासचिव आलोक चंद्राकर ने गिरीश देवांगन के नेतृत्व में तीजा पोरा महोत्सव स्थल का निरीक्षण किया

वरिष्ठ नेता गिरीश देवांगन के मार्गदर्शन में आलोक चंद्राकर ने आयोजन की तैयारियों का किया सूक्ष्म मूल्यांकन, समयबद्ध और उच्चस्तरीय व्यवस्थाओं पर दिया जोर।

रायपुर / यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और यह वैवाहिक सुख, समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए मनाया जाता है।
इसी तारतम्य में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी 23 अगस्त 2025 को तीजा पोरा त्योहार-खेल महोत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करने जा रहे हैं। आयोजन की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संयुक्त महासचिव एवं पूर्व उपाध्यक्ष, जीव जंतु कल्याण बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन, आलोक चंद्राकर ने महोत्सव स्थल का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गिरीश देवांगन के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

निरीक्षण के दौरान गिरीश देवांगन ने आलोक चंद्राकर को आयोजन की व्यवस्थाओं के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जिसमें कार्यक्रम को सफल संचालन के साथ आगाज करेंगे।

गिरीश देवांगन ने कहा कि, “यह महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक है। हमारी कोशिश है कि, तैयारियां पूरी तरह समय पर और उच्च स्तर पर पूरी हों, ताकि आयोजन अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सके।”

आलोक चंद्राकर ने कहा, “गिरीश देवांगन जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में आज स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। मैंने सभी संबंधित टीमों से बातचीत कर आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह आयोजन पूर्व वर्षों की तरह सफल और अनुकरणीय हो।”
मीडिया के समक्ष कांग्रेस नेता आलोक चंद्राकर ने तीज त्यौहार का महत्व बताते हुए बताया कि,


पारिवारिक महत्व


यह त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन        सामाजिक महत्व


तीज एक सामाजिक त्योहार भी है, जहां महिलाएं इकट्ठा होती हैं, सजती-संवरती हैं, झूले झूलती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटती हैं।

सांस्कृतिक महत्व


तीज भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न अंग है, जिसमें लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और रीति-रिवाजों की झलक मिलती है।

प्रकृति का उत्सव


तीज सावन के महीने में मनाया जाता है, जब प्रकृति हरी-भरी होती है, और यह त्योहार प्रकृति की सुंदरता, ताजगी और जीवन में हरियाली का प्रतीक है।
तीज कैसे मनाया जाता है?
महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।
वे भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं।
वे निर्जला व्रत रखती हैं (बिना पानी पिए उपवास)।
महिलाएं झूले झूलती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं।
पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं।
मेहंदी लगाती हैं।
एक-दूसरे को घेवर और अन्य मिठाइयां खिलाती हैं।
तीज का महत्व आज भी बरकरार है:
हालांकि आधुनिकता के कारण कुछ बदलाव आए हैं, तीज का त्योहार आज भी भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ता है, और उन्हें अपने प्रियजनों के साथ खुशी मनाने का अवसर देता है।

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